Pitra Dosha

Pitra Dosha

सूर्य को पिता माना जाता है | राहु छाया ग्रह है| जब यह सूर्य के साथ युति  करता है तो सूर्य को ग्रहण लगता है इसी प्रकार जब कुण्डली में सूर्य चन्द्र और राहु मिलकर किसी भाव में युति बनाते हैं  तब पितृ दोष लगता है|पितृ दोष होने पर संतान के सम्बन्ध में व्यक्ति को कष्ट भोगना पड़ता है| इस दोष में विवाह में बाधा, नौकरी एवं व्यापार में बाधा एवं महत्वपूर्ण कार्यों में बार बार असफलता मिलती है|

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कुण्डली में पितृ दोष के कई लक्षण बताए जाते हैं जैसे चन्द्र लग्नेश  और सूर्य लग्नेश जब नीच राशि  में हों और लग्न में या लग्नेश के साथ युति  या दृष्टि  सम्बन्ध बनाते हों और उन पर पापी ग्रहों  का प्रभाव होता है तब पितृ दोष लगता है. लग्न व लग्नेश कमज़ोर  हो और नीच लग्नेश के साथ राहु और शनि का युति और दृष्टि सम्बन्ध होने पर भी यह स्थिति बनती है| अशुभ भावेश  शनि चन्द्र से युति या दृष्टि सम्बन्ध बनाता है अथवा चन्द्र शनि के नक्षत्र या उसकी राशि में हो तब व्यक्ति की कुण्डली पितृ दोष से पीड़ित होती है|

जिनकी कुण्डली में पितृ दोष है उन्हें इसकी शांति और उपचार कराने से लाभ मिलता है| पितृ दोष शमन के लिए नियमित पितृ कर्म करना चाहिए अगर यह संभव नहीं हो तो पितृ पक्ष में श्राद्ध करना चाहिए| नियमित कौओं और कुत्तों का खाना देना चाहिए. पीपल में जल देना चाहिए| ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए| गौ सेवा और गोदान करना चाहिए| विष्णु भगवान की पूजा लाभकारी है|

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